गुरुवार, 19 नवंबर 2009

26/11 की कहानी, विदेशियों की ज़ुबानी !

क्या आपने कभी 26/11 के हमले को अंजाम देने वाले आंतकियों में से एकमात्र ज़िंदा आंतकी अजमल आमिर कसाब के बयान की ओरिजनल फुटेज देखी है? भारतीय टीवी चैनल्स पर तो नहीं देखी होगी, क्योंकि भारतीय टीवी चैनल्स को ये मुहैया ही नहीं करवाई गई। इसकी वजह भी साफ है ये संवेदनशील मसला है और इससे जुड़ी हर बात ज़रुरी नहीं की मीडिया से शेयर की जाए। लेकिन जो बात यहां नहीं बताई गई वो विदेशी चैनलों को मालूम है। सुरक्षा कारणों से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने ताज और ओबेराय के सीसीटीवी की सीमित फुटेज भारतीय मीडिया को मुहैया कराई और कसाब के बयान के बारे में भी मौखिक जानकारियां पत्रकार वार्ताओं के दौरान दी गईं। सैटेलाईट फोन के ज़रिए ये आंतकी अपने आकाओं से किस क़िस्म की बात कर रहे थे इसके बारे में भी बहुत ज़्यादा जानकारियां बाहर नहीं आईं। हमने भी 26/11 पर लगातार कवरेज किया लेकिन इन्हीं सीमित जानकारियों के साथ और ये मानकर भी की ये सुरक्षा का मसला है इससे ज़्यादा जानकारियां दिखाई भी नहीं जानी चाहिए। लेकिन इस हमले के लगभग एक साल गुज़र जाने के बाद भी एक विदेशी चैनल की डाक्यूमैंट्री देखकर मेरे रौंगटे खड़े हो गए। ये फ़िल्म 26/11 को ऑन एयर की जाएगी लेकिन एक दोस्त की मदद से इसकी एक्सक्लूसिव तस्वीरें देखने को मिलीं। मैंने पहली बार कसाब को बोलते हुए सुना और आश्चर्य हुआ ये जानकर कि ये लोग दिमाग़ी तौर पर कितने दीवालिया थे। बल्कि ऐसे ही लोगों को छांटा जाता है जो पहले से दिमाग़ी तौर पर कमज़ोर हों और जिनका ब्रेन वॉश आसानी से किया जा सके। कसाब बार-बार यही कह रहा था कि उन्हे जन्नत जाना था और जिन्होंने उन्हे यहां भेजा है वो खुद भी ये सब कर चुके हैं। मज़हब को बचाने के लिए उन्होंने ये सब किया। यहां पर भेजे जाने का मकसद सिर्फ और सिर्फ लोगों को बेरहमी से मारना था और पूरी दुनिया को दहशत का पैगाम पहुंचाना था। कसाब के साथ पूछताछ के अलावा सैटेलाईट फोन के ज़रिए पाकिस्तान में इन आतंकियों की आख़िरी दम तक चलने वाली पूरी बातचीत भी रौंगटे खड़ी करने वाली है। आतंकी कुबेर बोट को काबू में करने से लेकर दो-दो की टुकड़ियों में पांच जगह रवाना होने तक लगातार अपने आकाओं को अपडेट करते रहे। यहां तक की जिन लोगों को इत्मिनान से मारा गया, यानी अंधाधुंध फायरिंग के अलावा ताज, ट्राइडेंट और नरीमन हॉउस में मारे गए लोगों के बारे में आदेश वहीं से आए। सबसे ज़्यादा सनसनीख़ेज़ वाक्या तब पेश आया जब नरीमन हॉउस में बंधक बनाए गए परिवार को मारने के लिए कहा गया और आतंकी ने थके होने की वजह से कुछ समय की मांग की। थोड़ी देर बात आकाओं का फोन फिर आया उनका मकसद था कसाब को छुड़वाना इसमें कामयाबी नहीं मिलती देख उन्होंने बाकायदा इस दंपती को कैसे मारना है ये तक पाकिस्तान से बैठे बैठे बताया। उन्होंने कहा इनका मुंह दीवार की तरफ करके गोली दागो, फोन ऑन है मैं सुन रहा हूं। गोली चलने की एक आवाज़ आती है, पाकिस्तानी आका कहता है अब दूसरे को मारो और आंतकी कहता है एक से ही दोनों का काम हो गया है। इस तरह की सनसनीख़ेज़ बातचीत इन दस के दस आतंकियों से लगातार होती रही। पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं ने किस तरह भारतीय चैनल्स पर दिखाई जा रही लाइव तस्वीरों का इस्तेमाल किया इसे भी इस डाक्यूमेंट्री मे दिखाया गया है। खासतौर पर ताज में मौजूद आतंकियों से उनके पाकिस्तानी आका लगातार कह रहे थे सारी दुनिया की नज़र तुम पर है सारे चैनल्स ताज को तवज्जों दे रहे हैं, जब तक आग नहीं लगाओगे बात नहीं बनेगी। अल्कोहल और कालीन का इस्तेमाल करके जितनी बड़ी तादाद में आग लगा सकते हो लगाओ। आग से तस्वीरे और खौफनाक होंगी और दहशत पैदा करेंगी। इन आतंकियों ने ऐसा ही किया भी। नरीमन हॉउस में एनएसजी कमांडोज़ की कार्यवाई का लाइव ब्योरा जो कई भारतीय चैनलों ने दिखाया उसका अपडेट आतंकियों के आका उन्हें देते रहे। चाहे वो हेलिकॉप्टर का हॉउस के ऊपर आना हो या कंमाडोज़ का छत पर उतरना हो। ये आका बार-बार इस बात पर ज़ोर दे रहे थे कि ये आतंकी किसी भी सूरत में ज़िंदा न पकड़े जाए उन्हे ये बता कर भेजा गया था की जन्नत में हूरें उनका इंतज़ार कर रही हैं और मौत ही उनकी ज़िंदगी का मक़सद है। जब इन आंतकियों का हौंसला टूट रहा था तब उनके आका उन्हे बाहर निकलकर गोली बारी करने को कह रहे थे। उनका कहना था ये लोग थका कर तुम्हें ज़िंदा पकड़ना चाहते है लेकिन किसी हालत में तुम इनके हाथ मत आना। कसाब ने भी अपनी पूछताछ में यहीं बताया है कि जुम्मे के दिन तक पूरी दुनिया को दहशत में रखने के बाद मौत ही उनका आख़िरी मक़सद थी। सैटेलाइट फोन पर आखिरी बातचीत ताज में मौजूद फयतुल्ला से हुई वो कह रहा था जनाब मुझे दो गोलियां लगी है, मेरे लिए दुआ करें, मुझे जन्नत मिले, मैंने मजहब के लिए काम किया है, मेरे लिए दुआ करें.......... इस पागल हैवान के आका पूछ रहे थे गोली कहा लगी है.... जिंदा पकड़ में मत आना.... जन्नत ज़रुर मिलेगी। उनका मकसद था इस दहशत को फैलाकर इन लोगों का मर जाना क्योंकि जिस तरह कसाब अंतराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ एक पुख्ता सबूत है उसी तरह अगर एक दो आतंकी और ज़िंदा पकड़ लिए जाते तो इन सबूतों को और मज़बूती मिलती। फयतुल्ला का फोन ऑन रखने के लिए कहकर उसके आका गोलीबारी की आवाज़ों को सुनते रहे और जब उसने जवाब देना बंद कर दिया तब उन्होंने फोन डिसकनेक्ट किया यानि वो मर गया है इस बात की तसल्ली हो जाने के बाद ही उन्होंने सुकून की सांस ली। ये पूरी बातचीत ये भी बताती है की ये दस आतंकी कुछ भी नहीं थे महज़ कठपुतलियां थे और इनकी डोर पाकिस्तान में बैठे इनके आका सैटेलाइट फोन के ज़रिए खींच रहे थे। इन फुटेज और बातचीत को देखकर आतंक से नफरत करने वाले किसी भी शख्स को इस आतंकी हमले के पीछे मास्टर माइंड्स की भूमिका के बारे में और जानकारी मिलती है। साथ ही साथ मज़हब के नाम पर किस तरह युवाओं का ब्रेन वॉश कर उनसे घिनौना काम करवाया जाता है ये भी साफ होता है। ये तस्वीरें ऐसे युवाओं को भी चेताती है जिन पर इन पाकिस्तानी आकाओं की नज़र होती है। ख़ैर ये तो इनकी हक़ीक़त थी लेकिन एक भारतीय मीडियाकर्मी होने के नाते मुझे खेद इस बात का है की इस तरह की कोई बातचीत या फुटेज हमें मुहैया नहीं कराई गईँ। वैसे ये विदेशी चैनलों को भी मुहैया नहीं करवाई गईं थी, लेकिन भारतीय जांच एंजेसियों ने जो फुटेज और बातचीत एफबीआई को मुहैया करवाई वो इन विदेशी चैनलों को अपने सूत्रों से हासिल हो गईं। भारतीय मीडिया को ये क्यों नहीं दी गईं इसका पुख्ता कारण तो मुझे नहीं मालूम, लेकिन भारतीय दर्शक को ये ज़रुर देखने को मिलेगी क्योंकि जिन विदेशी चैनलों पर ये फुटेज आने वाली है उनके दर्शकों की संख्या यहां भी बड़े पैमाने पर है। यानी भारतीय दर्शक तो इन्हे देख पाएंगें लेकिन विदेशियों की ज़ुबानी।

6 टिप्‍पणियां:

विनीत कुमार ने कहा…

अब आप अंदाजा लगाईए कि देश के भीतर जो हिन्दी चैनल हैं वो तालिबान,अफगानिस्तान और दूसरे देशों में हो रही आतंकवादी घटनाओं की खबरों के नाम पर क्या दिखाते हैं?

शिवम् मिश्रा ने कहा…

क्या कहे .......शब्द नहीं मिल रहे है ! बस यही दुआ है कि अब एसा कुछ न होने पाए अपने देश में !
जहाँ तक पाकिस्तान और उन आतंकियों का सवाल है तो आप से कुछ भी छिपा नहीं है इन लोगो का भी जन्नत जाना पक्का है और आजकल तो लगभग यह लोग रोज़ ही जा रहे है जन्नत !!

Neeta Kacker ने कहा…

It's really sad....though Indian Media is very powerful, yet it’s a handicapped in the name of laws n securities n bla-bla-bla....if foreign Media can why can’t Indian Media....
It was horrifying....I still get goosed hair coz of its memories...my house was not less than any news room when it happened...I did go to work next morning but without any sleep as I was flipping channels n praying for everything to get controlled....even saw the senior encounter specialist reaching the spot n a short while later a sad news about him too...even @ work place, all TVs on every wall had this news coverage going on...all our clients(International)were concerned n were trying to find out the facts from us over the ph....it’s a humble request to all our media personals....there r two professions globally which r really powerful....TEACHING & MEDIA....coz here in these professions all r highly qualified n intelligent....n weather it is to prove their say or to fight the situation n the world they do not use one and only weapon and that is their PEN...which leaves the mark behind which can never be erased n also leaves the gr8 impact on all...though not from media but a great admirer of all the intellectuals here....I m sure my voice will b paid attention to...for I strongly believe in impossible...***I M POSSIBLE*** {INDIA MEDIA IS POSSIBLE}
CHEERS!!! <3
Neeta Kacker

Neeta Kacker ने कहा…

It's really sad....though Indian Media is very powerful, yet it’s a handicapped in the name of laws n securities n bla-bla-bla....if foreign Media can why can’t Indian Media....
It was horrifying....I still get goosed hair coz of its memories...my house was not less than any news room when it happened...I did go to work next morning but without any sleep as I was flipping channels n praying for everything to get controlled....even saw the senior encounter specialist reaching the spot n a short while later a sad news about him too...even @ work place, all TVs on every wall had this news coverage going on...all our clients(International)were concerned n were trying to find out the facts from us over the ph....it’s a humble request to all our media personals....there r two professions globally which r really powerful....TEACHING & MEDIA....coz here in these professions all r highly qualified n intelligent....n weather it is to prove their say or to fight the situation n the world they do not use one and only weapon and that is their PEN...which leaves the mark behind which can never be erased n also leaves the gr8 impact on all...though not from media but a great admirer of all the intellectuals here....I m sure my voice will b paid attention to...for I strongly believe in impossible...***I M POSSIBLE*** {INDIA MEDIA IS POSSIBLE}
CHEERS!!! <3
Neeta Kacker

राकेश त्रिपाठी ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
anupama ने कहा…

It is amazing the way 26/11 attack has been taken ,we blame the politicians , and now who defends the case of kasab and now as certain things which some have shown and one channel could not but has anybody thought why does a person become a terrorist , it is none other than we all when we torture mentally and humiliate our child on its failer take advantage of anybody,s problems for personal benefit a terrorist knows his life will end soon but he is bothered because he so much hatred given by the world that he does bother his life but wants to destroy the world so if want a terrorist to not come forward do not spread hatred by our acts ,interfering in people life for a masala and vested interest pointing out fingers of hatred have no right to speak of tears as they are first responsible for giving those tears in the eyes of people